Sunday, 25 June 2017

हाइकू रोशनी

हाइकू रोशनी/प्रकाश /किरण 


१ काल कोठरी
आशा जगाये रखे
संद किरण

२.बालियां पकें 
और फल रसीले 
धूप किरण

३. महापुरुष
देखें,सुनें व गुनें
अंतर्ज्योति से
 
४. बंद नेत्रों से
देखे प्रकाशपुंज
अनुभव से

५.धूप- छाँव से
डरें,खेलें व हंसें
बच्चे नादान

६.गोधूली दीप
रखा दरवाज़े पे
याद आई माँ

७. छद्म प्रकाश
व्यसन लोलुपता
प्यास बढायें

८. तेज़ रोशनी
कानफोडू संगीत
अँधा बहरा

९. धीमी रौशनी
कोमल स्वरगीत
नशीले पल

१०. अंधी सुरंग
एक बूँद रोशनी 
आशा किरण

११. गम या भय 
मोमबत्ती जलायें
शोक मनाएं

१२. होती है काफी
थोड़ी सी भी रोशनी
दिखाती रास्ता

१३. लोलुप दृष्टि
अंधा बना के छोड़े 
कुछ ना देखे

१४. कुछ हटीले
बावज़ूद रौशनी
देख ना पाते

१५. कुछ घमंडी
रोके ज्ञान प्रकाश
न लें, ना ही दें 

मनीषा सक्सेना
जी १७ ,बेलवेडियर प्रेस कंपाउंड
मोतीलाल नेहरु रोड

इलाहाबाद,२२१००१

Friday, 23 June 2017

लघुकथा .....वो आ गए

                           वो आ गए
बड़े बाबा के जिगरी दोस्त,छोटे चाचा यूँ तो हमारे परिवार की रिश्तेदारी में कुछ नहीं लगते पर रिश्तेदारों से बढ़कर करते हैं |घर पर कोई मौका हो गम का या खुशी का,पिछले चालीस सालों से,वे सदैव उपस्थित रहते हैं|घर के किसी भी सदस्य का जन्मदिन हो या शादी की सालगिरह ,छोटे चाचा गुलाबजामन की हंडिया लेकर आते | ढेरों आशीष तो देते ही थे ,शेरो शायरी सुना कर माहौल को खुशगवार बना देते थे |हम सब भाई बहिन हँसते हुए आपस में कहते “वो आये नहीं ?”या “वो आ गए हैं |” “वो आ रहे हैं|”
           आजकल के बच्चों व बहुओं को ये बात नागवार गुज़रती है बिन बुलाए मेहमान ,खातिर करो सो अलग |होटल में जन्मदिन मनाना हो तो जा नहीं सकते क्योंकि शाम को “वो आयेंगे”|घुमा फिरा कर बच्चे भी उनसे कहने लगे “आजकल तो व्हाट्सेप,फोन,ईमेल की इतनी सुविधा हो गयी है|आप इतनी गर्मी में बाहर मत निकला करिए ,आपकी तरफ से चिंता रहती है और आप भी धूप में परेशान होते हैं| “अरे नहीं बरखुरदार ,जबतक आपस में मिल बैठ कर बातचीत न कर लें,तबतक मन नहीं भरता है और तुम लोगों को देखे बिना चैन भी तो नहीं पड़ता है |ईमेंल व्हाट्सेप वगैरह तो बेकार की चीज़ है |हाँ दूरदराज़ में रहने वाले लोगों से वार्तालाप के लिये तो ठीक है,पर इससे आत्मीय सम्बन्ध नहीं बन पाते हैं | फिर धीरे से बोले “अच्छा अब मैं चलता हूँ|”
अगले दिन बिट्टू का जन्मदिन ,सुबह सुबह व्हाट सेप  पर गुलाबजामुन की हंडिया के चित्र के साथ छोटे चाचा का बधाई सन्देश आया|घर में दिन भर चुप्पी का दमघोंटू माहौल रहा |सबकी निगाहें दरवाज़े पर टिकी थीं ,शायद अब “वो आ गए”---------