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Sunday, 18 January 2026

हाइकू पतंग

 पतंग

1. छूती मेघ वो

सुदृढ़ हाथ हों तो

नाजुक पतंग

2.लूटे दबंग

गलत हाथों पड़ी

फंसी पतंग

3.मेघ में दिखी

हज़ारों में एक

मेरी पतंग

4.डोर नचाती 

इठलाती पतंग

गोता लगाती 

5. काट न पाए

जलवा है डोर का

घूमी पतंग

6.तेरा कि मेरा

जलवा है माझे का

नाचे पतंग

7.एक से एक

पतंग ही पतंग

अद्भुत जंग

8.गर्वीली जंग 

तकनीकी कौशल

ऊंची पतंग

9.कट न जाए

अपनी ही पतंग

ध्यान प्रथम

10.छिड़ी है होड़

नभ को घेरने की

दंभी पतंग

11.छैल छबीली

लचके कोमलांगी

दंभी पतंग

12.काट न पाए 

लालच दे पतंग

जमीनी डोर

13.नभ में छाई

पतंगें रंग भरी

ढूंढो अपनी

14.कन्नी है पक्की

रंग ,रूप ,डोर भी

ललकारती

15.झिलमिलाती

नभ छूती पतंगें

गर्वीले दृश्य

16. मांझा है पक्का

कोरी नहीं पतंग

जान लें सब

17.रोके न रूके

आवारा मदमस्त

कोरी पतंग

मनीषा सक्सेना 

प्रयागराज

15जनवरी 2026

Saturday, 17 January 2026

हाइकु संक्रांति

 संक्रांति पर हाइकु

1.संक्रांति पर्व

तन मन धन का

सदा मनाएं

2.पर्व दो दिन

बच्चा बूढ़ा मनाएं

कर्ता हैरान

3.तन का स्नान

धन धान्य का दान

ढीली उड़ान

4.फूलती तिल

साथ लडडू गोपाल

पोपला दानी

5.चीन के मांझे

ऊंची उड़ान भरे

पंखों को काटे 

6.करे ऐलान 

जा ठिठुराती सर्दी

पर्व मकर

7.समय श्रेष्ठ 

करें मन संक्रांत

बनिए श्रेष्ठ।

संक्रांत यानि (बदलाव)

मनीषा सक्सेना 

प्रयागराज

जनवरी 2026

Thursday, 8 March 2018

हाइकू दिल


हाइकू  दिल


दिमाग जाने

समय ले, माने भी

दिल ना माने


स्वयं गलत

तर्क दे समझौता

दिल निगोड़ा


दूजा गलत

न्याय मांगे हमेशा

पत्थर दिल


भूले न गलती

न रखे याद सही

बोझिल दिल


खोलना दिल

सोच समझ कर

पीड़ित दिल


औरों की खुशी

स्वयं दिल दुखाये

रिश्ता निभाये


करें कुछ ना

रूके, देखे व चले

बेदर्द दिल


दिल की ठेस

माफी से भी ना जाए

माफी ही मांगे


इश्क कमीने

चौकलेट गुब्बारे

दिल दिखाते

१०

बड़ी बातों से

छोटी बातें समझें

बड़े दिल वाले

११

नया दर्द ही

दवाई है दिल की

तजुर्बा बांटे

१२

झूला झूलता

काश अगर मध्य

दिल दर्दीला

१३

गैर हो गए

वक्त बदलते ही

दिले अज़ीज़

१४

दायें बाएं हों

अगर मगर करे

दिल के खोटे|

 

मनीषा सक्सेना

 
 

 

 

Saturday, 12 August 2017

हाइकू शब्द

 हाइकू शब्द
खो देते अर्थ 
भारी भारी से शब्द
सरल कहें
शब्द सरल
भले, सुने न जाएँ
रखें महत्व
शब्द ही शब्द
ढूँढ़ते हैं भीड़ में  
अपने अर्थ
कड़वे शब्द
चाशनी डूबे हुए
पचाते लोग
शब्दों की मार
घाव करे गंभीर
ता उम्र रहे
शब्द चुनाव
सादे, सोचे-समझे
डालें प्रभाव
शब्द मीठे से
कानों में मिश्री घोलें 
काम निकालें 
ढाढस देते
फेरे सिर पे हाथ
मौन हैं शब्द
हैं बिके हुए
हाँ में हाँ करें शब्द
जाल बिछाएं
१०
मोती से शब्द
आँखों से ढुलकते
हाल ए दिल
११
सीटी से शब्द
सुहावना मौसम
हाल ए बयाँ
१२
चांदनी रात
निशब्द हम दोनों
बातें करते
१३
शब्दों से ज़ियादा
शब्दहीन उपेक्षा
सालती टीस
१४
मिले न शब्द
प्राकृतिक वैभव
निहारें सब

 १५
शब्दों का खेल
बनाए या बिगाड़े
दिलों का मेल
१६
शब्दों का जाल
घुमाव आकर्षक
बुरा हो हाल

मनीषा सक्सेना
इलाहाबाद                     

Sunday, 25 June 2017

हाइकू रोशनी

हाइकू रोशनी/प्रकाश /किरण 


१ काल कोठरी
आशा जगाये रखे
संद किरण

२.बालियां पकें 
और फल रसीले 
धूप किरण

३. महापुरुष
देखें,सुनें व गुनें
अंतर्ज्योति से
 
४. बंद नेत्रों से
देखे प्रकाशपुंज
अनुभव से

५.धूप- छाँव से
डरें,खेलें व हंसें
बच्चे नादान

६.गोधूली दीप
रखा दरवाज़े पे
याद आई माँ

७. छद्म प्रकाश
व्यसन लोलुपता
प्यास बढायें

८. तेज़ रोशनी
कानफोडू संगीत
अँधा बहरा

९. धीमी रौशनी
कोमल स्वरगीत
नशीले पल

१०. अंधी सुरंग
एक बूँद रोशनी 
आशा किरण

११. गम या भय 
मोमबत्ती जलायें
शोक मनाएं

१२. होती है काफी
थोड़ी सी भी रोशनी
दिखाती रास्ता

१३. लोलुप दृष्टि
अंधा बना के छोड़े 
कुछ ना देखे

१४. कुछ हटीले
बावज़ूद रौशनी
देख ना पाते

१५. कुछ घमंडी
रोके ज्ञान प्रकाश
न लें, ना ही दें 

मनीषा सक्सेना
जी १७ ,बेलवेडियर प्रेस कंपाउंड
मोतीलाल नेहरु रोड

इलाहाबाद,२२१००१

Monday, 15 May 2017

हाइकू धूप

                                       हाइकू धूप
राहत देती
घुटने सहलाती
टुकड़ा धूप
पहाड़ स्पर्श
आचमन झीलों का
पधारी धूप
वक्त की छन्नी
बारीक-दरदरा
छानती धूप
थी गुलाब वो
बनी है अब शूल
धूप बबूल
तप के आई
बादलों से लड़ती
साहसी धूप
खेत में सोना
फलियों में मणिका
बो गई धूप
भोर को लाल
संध्या को सुनहरा
रंगती धूप
कभी झरोखों
कभी द्वार संदों से
झांकती धूप
टेसू पलाश
दहकें लपटों से
लुभाती धूप
१०
नवीन ख़ोज
नवल आविष्कार
विज्ञान धूप
११
गिरि से कूदी
वृक्ष फुनगी टिकी
फुर्तीली धूप
१२
फूलों में रंग
पत्तों में हरियाली
सुगंधा धूप

मनीषा सक्सेना



Wednesday, 10 May 2017

हाइकू बोनसाई

 हाइकू बोनसाई
१ 
छटा निराली
उथले गमलों में
बोनसाई की

छत छज्जों को
फल फूल से भरे  
ये बोनसाई

छोटे हैं तो क्या
ठसक बोनसाई की
छज्जा है सजा

बोनसाई दें
मज़ा फल तोड़ने
का,बैठे लेटे

गुदड़ी लला
बोनसाई करौंदा
बारजे फला
 

जा अला बला
बड पीपल नीम
मेरे आँगन

देवता वास
बौने बड नीम में
छत आँगन

पीपल नीम
छत छज्जे आँगन
देंवें आशीष



बोनसाई का
कमरख करौंदा
मन चटोरा
१०

प्रकृति कृति
बनी है बोनसाई
आँगन परी
११

दिल गमला
बोनसाई गर्वीला
शान से खड़ा
१२

भोला भाला सा
बोनसाई फलों का
मन मचले

१३

बच्चा है दिल
बोनसाई फलांगे
भूल न पायें
१४  

छज्जे आँगन
बोनसाई पटे हैं
कूँ बाती खेलें
१५  

हरी चुनरी में
नारंगी बोनसाई
उकडूं बैठी
१६

आँखों का नूर
हर्बल बोनसाई
देते ताज़गी
१७

उथला वास
ठसक बोनसाई
निकली पड़ी
१८

थाली गमला
नारंगी बोनसाई
नाचती फिरी
१९

मोटू सेठ सा
गमला बोनसाई
ठसका बैठा
२०

प्रकृति कृति
आकाश छूते घर
धरा दिखाए
२१

अनुशासन
बोनसाई सिखाये
मुड़ेल खड़े
२२

थोड़े में जीना
सिखाए बोनसाई
शान से जीना
२३

छत छज्जों पे
फल फूल से भरे
ये बोनसाई
२४

प्रकृति गान
सुनाए बोनसाई
बारजे खड़े
२५


शहरी वधु
रूप बोनसाई सा
कटा छटा सा
२७  

छोटा है तो क्या
हज़ारों रूप धरे
ये  बोनसाई
२८

वन तुलसी
बोनसाई रंग में

खुशबू उड़ी