आयल पेस्टल क्रेयॉन से बने गणेश जी
2.3.
4.
5.
6.
7.
पाषाण युग में पत्थरों पर गणेश जी की आकृति उकेरी जाती थी पर बस आकार से समझ आता था।जैसा जो पत्थर था उसी पर खड़िया, कोयला ,गेरु से बस पोता जाता था।उसी को ध्यान रखते हुए कुछ छवियां बनाई हैं।
आदिमयुगी गणेश की छवियां
1.काली कार्ड पेपर पर रेखाओं से गणेशजी की आकृति उकेरी है ।रेखाओं को सुनहरे और रूपहले ब्रश पेन से उभारा है। पृष्ठभूमि में ऑयल पेस्टल क्रेऑन से रंगीन किया है।
जन्माष्टमी पर कुछ लाइन ड्राइंग पेन और crayon कलर से बनाई हैं।आप सबको जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।
गोविंदरक्षा बंधन के अवसर पर कुछ हाइकु प्रस्तुत हैं।1.भावुक बातें
पेशेवर संबंध
राखी से बाँधे।
2.भीतरी ईश
शक्ति भाव आशीष
रक्षा सूत्र दे।
3.इंसानी रिश्ते
पीछे छूटते धर्म
राखी मिसाल
4.एक संतान
गढ़े सामाजिक मूल्य
समृद्ध घर
5.रस्मी राखी
व्यवहार निभाती
खोया अर्थ
6.मैं तो हूं ही न
धागा कलाई सजा
मूल्य संस्कार
7.प्रेम का धागा
निर्मल तन मन
है रक्षा सूत्र
8.मूल्य राखी का
चुका न पाये कभी
भेंट सौगात
9.रक्षा का सूत्र
भाई बहिन जोड़े
साथ निभाते।
मनीषा सक्सेना
प्रयागराज
पतंग
1. छूती मेघ वो
सुदृढ़ हाथ हों तो
नाजुक पतंग
2.लूटे दबंग
गलत हाथों पड़ी
फंसी पतंग
3.मेघ में दिखी
हज़ारों में एक
मेरी पतंग
4.डोर नचाती
इठलाती पतंग
गोता लगाती
5. काट न पाए
जलवा है डोर का
घूमी पतंग
6.तेरा कि मेरा
जलवा है माझे का
नाचे पतंग
7.एक से एक
पतंग ही पतंग
अद्भुत जंग
8.गर्वीली जंग
तकनीकी कौशल
ऊंची पतंग
9.कट न जाए
अपनी ही पतंग
ध्यान प्रथम
10.छिड़ी है होड़
नभ को घेरने की
दंभी पतंग
11.छैल छबीली
लचके कोमलांगी
दंभी पतंग
12.काट न पाए
लालच दे पतंग
जमीनी डोर
13.नभ में छाई
पतंगें रंग भरी
ढूंढो अपनी
14.कन्नी है पक्की
रंग ,रूप ,डोर भी
ललकारती
15.झिलमिलाती
नभ छूती पतंगें
गर्वीले दृश्य
16. मांझा है पक्का
कोरी नहीं पतंग
जान लें सब
17.रोके न रूके
आवारा मदमस्त
कोरी पतंग
मनीषा सक्सेना
प्रयागराज
15जनवरी 2026