सोशल मीडिया पर ऐसे लोग हैं जो हर रोज़ एक
ही नहीं, सारे मंचों पर यानी कि इनस्टाग्राम, फेसबुक, व्हॉटसेप सब पर अपनी तस्वीर
चस्पा करते हैं|कहीं होटल में खाने गए वहां की तस्वीर, टूर पर जा रहे हैं तो… हवाईअड्डे की फोटो, घूमने गए तो.. इमारतों, नदियों, समुद्रतट की फ़ोटो,सबके साथ
साझा करते हैं|घरवालों और दोस्तों के लिए तो ठीक है किअलग अलग फोटो भेजने की बजाय सोशल
मीडिया पर सबके साथ साझा कर ली पर गैरों को उससे क्या? बच्चों के साथ सेल्फी तो
समझ में आती है कि बच्चों का भोलापन चंचलता सबको आकर्षित कर सकती है पर “अपने ही
सुहाते हैं” मानने वाले लोगों का तो इन पर भी, ध्यान ही नहीं जाता है| कुछ लोग घर
के हर कोने के साथ,घर के बगीचे में,बनाए गए क्राफ्ट के सामान,नए फर्नीचर, विभिन्न
व्यंजनों के साथ, कुछ नहीं तो अपने पालतू पशुओं के साथ भी सेल्फी लेकर प्रतिदिन
डालते रहते हैं और फिर “मुझे पसंद करो” की गुहार भी लगाते हैं|
सेल्फी का जूनून इस हद तक आ पहुँचा हैकि
ये सूरत के दीवाने अपने चेहरे मोहरे को निखारते ही रहते है|एप्स के ज़रिये त्वचा के
दाग धब्बे छुपाते,त्वचा का रंग व चमक बदलते,आँखों व होठों के आकार को बदलते रहते
हैं ताकि उनकी तस्वीर सुन्दर से सुन्दरतम हो जाए और कमियां ना दिखें|सेल्फी खींचते
वक्त वे उसमें इतना खोये हुए होते हैं कि कई बार बगल से गुज़र रहे व्यक्ति से टकरा
जाते हैं या खुद ही लड़खड़ा कर गिर जाते
हैं| चलती गाडी,मेट्रो,पहाड़ों,गुफाओं, समुद्र की लहरों, इमारतों आदिमें सही स्थान
चुनने के चक्कर में जान पर खेलने से भी गुरेज़ नहीं करते हैं| उनका मानना है कि ऐसी
सेल्फी लोग ज्यादा पसंद करते हैं,लाइक ज्यादा मिलते हैं|
ये तो हुई तस्वीरों की बात |कुछ वे लोग
हैं जो हर रोज़ एक नया सुभाषित विचार-गहन गंभीर हो या कोई भावुक सी बात, अग्रेषित
करते रहते हैं|इन लोगों में अधिकतर वे लोग हैं जिनसे हम आमने सामने उतना नहीं
मिलते जितना कि इस सोशल मीडिया के मंच पर मिलते हैं| कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनसे
केवल यहीं मुलाक़ात होती है और इसी आधार पर हम उनके बारे में राय बनाते हैं|
आम राय यह होती है कि जो लोग अपनी बहुत
सारी सेल्फी लगाते हैं, वे आत्ममुग्ध होते हैं| जिसके कारण कई ऑनलाइन दोस्त उनसे
बचने की कोशिश करते हैं| जो लोग रोज़ रोज़ सुभाषित वचन भेजते हैं उनके बारे में हम
ये मान बैठते हैं की कुछ अपने या उधार के वचनों से वे अपने को विद्वान साबित करने
पर तुले हैं| इनके बारे में भी आमराय अच्छी नहीं होती भले ही राय देने वाले ये लोग,
खुद भी गाहे-बगाहे सुभाषित वचनों को फौरवर्ड करते नज़र आ ही जाते हैं|
जो कर रहा है उसे अपना काम करने दीजीये
पर उनके बारे में बनी आम राय क्या सही है? मनोवैज्ञानिकों ने इसे समझने की कोशिश की|
इस पर शोध किया और परिणाम चौंकाने वाले आये| अमृतवचन और सेल्फी भेजने वालों की
ऑनलाईन सक्रियता के साथ ही उनकी मानसिक स्थिति और बौद्धिक स्तर (I.Q) का भी अध्ययन
किया गया| शोध में पाया गया कि सेल्फी लगाने वाले लोग, अमृतवचन भेजने वालों के मुकाबले
कम आत्ममुग्ध होते हैं| सुभाषित वचनों को भेजने वालों की आत्ममुग्धता सूरत पर ना होकर अपनी अक्ल व
गंभीरता पर होती है|इसके विपरीत सेल्फी लगाने वालों में आत्मसम्मान ज्यादा पाया
जाता है| सेल्फी लेने वालों में रचनात्मकता भी ज्यादा होती है| यह भी पाया गया है
कि दोनों आदतों का, बौद्धिक स्तर से कोई लेना देना नहीं है| लेकिन जनरल ऑफ रिसर्च
इन पर्सनेलिटी में प्रकाशित यह अध्ययन हमें यह नहीं बता पा रहा है कियदि यह बात सच
है तो सेल्फी लगाने वालों के बारे में आम राय इतनी खराब क्यों है?
जब हमें दूसरों की सेल्फी से लेना देना
नहीं है तो फिर हम सोशल मीडिया पर उसके ऊपर अपनी प्रतिक्रिया क्यों देते हैं?
क्यों लाइक, डिसलाइक या सबस्क्राइब करते हैं – पसंद आया इसलिए, उसे खुश करने के
लिए, दया खाकर (शायद उसे आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ),अपने को महान साबित
करने के लिए(क्योकि हमारी सुनी जा रही है भले हमारी अपनी ही नज़र में ये तारीफ़ झूठी
ही क्यों न हो),खाली बैठे आसान से काम में व्यस्तता का दिखावा करने के लिए या फिर
खाली टाईमपास करते हैं|
सेल्फी की अधिकता का कारण मेरी समझ में
निम्न हैं| पहला ----पिछले दशक में सोशल मीडिया का विकास तेज़ी के साथ तो हुआ ही है,विभिन्न
सुविधाओं से लैस मोबाइल कैमरोंके साथ-साथ खींची गयी तस्वीरों के कांटछांट करने
वाले ऐप बढ़िया से बढ़िया होते जा रहे हैं जिससे रचनात्मकता को बढ़ावा मिला है| यही
रचनात्मकता व्यक्ति को जुनून की हद तक ले जा रही है| दूसरा--एक ऐसी पीढी हमारे
सामने है जिसने इतनी संख्या में तस्वीरें खींची हैं जितनी कि कैमरे के आविष्कार के
बाद, पिछली सारी पीढ़ियों की कुल जमा तस्वीरें भी इतनी संख्या में नहीं थीं|ऐसा
इसलिए हुआ कि इसमें होने वाला खर्च न्यूनतम हो गया, फ़ोटोग्राफ़र पर निर्भरता भी
नहीं रह गयी है|तीसरा ---सेल्फी खींचने वालों का मानना है कि ये ध्यान आकर्षित
करने में ज्यादा कामयाब होती हैं| लोगों की प्रतिक्रिया भी सेल्फी को ज्यादा मिलती
है| रातोंरात स्टार बनने की चाह भी पूरी हो सकती है|
मनीषा सक्सेना
जी १७ बेल्वेडीयर
प्रेस कम्पाउंड
मोतीलाल नेहरू रोड
प्रयागराज २११००२