Saturday, 24 August 2019

व्हाट्सेपीया जन्माष्टमी


व्हाटसेपिया जन्माष्टमी
जबसे स्मार्ट फोन आये हैं हम जैसे रिटायर्ड लोगों का दिन का अधिकाँश भाग माला की बजाय उसी पर उँगलियाँ फेरते बीतता है|बच्चे तो नौकरियों के चक्कर में उत्तरप्रदेश से बाहर हैं| बहुत पास हुए तो नोएडा या गुडगाँव मेंपाये जाते हैं नहीं तो चिन्नई, हैदराबाद, बंगलौर पूना या अहमदाबाद|घर की साफ़ सफाई से लेकर तीज -त्यौहारों के लिए शनिवार इतवार का मुंह ताकते रहते हैं और यहाँ हम यहाँ बुज़ुर्ग जवान व्हाटसेप पर अपनी दुनिया विभिन्न ग्रुप में शामिल होकर खुशियाँ मनाते हैं जैसे ननिहाल, ददिहाल, स्कूल फ्रेंड्स, कॉलेज ग्रुप, परिवार, इलाहाबादी, चुंगी, कटरा किटी, हम साथ साथ, इसके साथ ही पचासों मित्र व अड़ोसी- पड़ोसी|
          सुबह ५ बजे से ही जन्माष्टमी की बधाईयाँ व शुभकामनाएं आने लगी |सुबह देखकर ही मन प्रसन्न हो गया|स्टीकर, एनिमेटिडफिल्म, कृष्णजी की नैतिक सूक्तियों में खो ही रही थी कि मथुरा के ननिहाल ग्रुप के (पांच मौसी व दो मामा उनके बच्चे और फिर उनके भी बच्चे व कुछ की बहुएं व दामाद भी यानि कि पचास साठ लोग घर के ही) सूत्र धार मेरी मां व मामा|मां का ऑडियो आया ......मैं तो गोकुल नगरिया जाउंगी नंदरानी से बधाई ले के आउंगी ,,,वाऊ मौसी ,वाह दीदी आपकी आवाज़ में तो जादू है .....इस उम्र में इतना सुरीला गीत.......ननिहाल की लतामंगेशकर ......| मौसी आपका गीत सुनकर मुझे भी याद आया मम्मी ने छठी क्लास में हारमोनियम पर सिखाया ,,,,बरजो बरजो न श्यामबिहारी रे ,मैं तो यशोदा से करुँगी पुकार रे.......हाथ मिलाओ दीदी बचपन के दिन याद आ गए .......बहुओं जागो ...सास व नन्द का पलड़ा भारी हो रहा है .......झूम झूम मन मोहन रे ,मुरली मधुर सुनाये जा ......वाह भाभीजी कितना पुराना गाना ......नानी-नाना के साथ दशहरा मैदान में ये पिक्चर देखी थी|........जन्म लियो है कन्हिया ,गोकुल में बाजे बधईया........छोटी भाभी क्या कमाल  का गाना सुनाया मथुरा के आँगन की यादें ताज़ा हों गई भैंसवाली ने क्या ढोलक बजाई थी और मिश्राइन के ठुमके ...वाह वाह.......”नंदलाला हो ,नंदलाला हाय.... मार जाए केसर के फुलवा” .......ये गाना याद है... आकाशवाणी पर दोपहर में महिलाओं की लिए कार्यक्रम आता था, उसके लिए तैयार किया था|पंद्रह दिन रोज़ शाम को प्रेक्टिस की थी|सबसे छोटी मौसेरी बहिन का ऑडियो आया .....श्याम मरो छलिया, बची रहियो गौरी..... वही बिंदास आवाज़ व गाने का स्टाइल | ममेरी भाभी ने तुरंत उत्तर दिया .....सांवरी सूरत पे मेरा दिल दीवाना हो गया .......अच्छा जी, भैया पर गाना गाया है|हमारे घर के नगीने......गुमनामी में खोये कलाकारों को आगे लाने का मंच है हमारा परिवार ......ननिहाल नाम बदल कर “सुरीला हमारा ननिहाल” हो गया ....साथ ही आँख मारती इमोजी व हाथ मिलाता हाथ भी...... फिर श...श.... |मौसेरी, ममेरी बहनों की इशारेबाज़ी भी अभी चल ही रही थी कि...... मेरी बहु ने गाया है .....अचुतम केशवं कृष्ण दामोदरम......अहो भाग्य हमारे ....तीसरी पीढ़ी भी सुरीली ...यशोमती मईया से बोले नन्द लाला .......मेरी भी गाती है .......मईया यशोदा ये तेरा कन्हिया .......प्लीज़ कान बंद करके सुनियेगा......... बड़ा मज़ा आ रहा है.......मम्मीजी ऐसे भी सबसे मिल सकते है सोचा नहीं था कभी |
 श्रीमानजी बडबडाते हुए बोले आज खाना वाना नहीं मिलेगा क्या दिनभर फोन पर लगी रहती हो ......ननिहाल की जन्माष्टमी का सुख तुम क्या जानो इलाहाबादी बाबू .......लो देखो कुछ भी कॉपी पेस्ट .....तुम्हारे शब्दों में ....इधर का उधर नहीं है सब ओरिजनल है,कह कर फोन थमाया ....कहाँ हो .......चलो खाना खाएं ......वाकई मान गए पर एक बात तो है...... लोकगीत से फ़िल्मी गीत का ये सफ़र नानीजी देख लेती तो दुखी ज़रूर होती ........नहीं जी .....कहतीं .....बहुओं को आये दिन ही कितने हुए हैं, घर में रहकर सब सीख जावेंगी .......घर में रहें और सीखना चाहे तब ना .........|
मनीषा सक्सेना
जी १७ बेल्वेडीयर प्रेस कम्पाउंड
प्रयागराज

3 comments:

  1. समसामयिक, बेहतरीन लेख।

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  2. बहुत ही अच्छा लिखा है दीदी आपने।

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  3. Kya nadiya starkey sey piya hai.

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