Friday, 14 August 2015

एक बड़ा सवाल


स्कूल में मध्यांतर हुआ |सब बच्चे अपने अपने टिफिन बॉक्स लेकर मैदान में जमा थे |रीना बड़े चाव से दादी के हाथ के बने आलू के पराठे खा रही थी |उसकी सहेली कुहू टिफिन खोल कर चुपचाप बैठी थी|
“कुहू जल्दी से टिफिन ख़त्म करो, घंटी बजने वाली है “
“रीना मुझे गणित का सवाल नहीं आया |देखना, मुझे शून्य अंक मिलेगा और घर पर मम्मी की डांट पड़ेगी| “
“हाँ कल मुझे भी नहीं आ रहा था| तुमने नेट पर सर्च किया था?”
“किया था |अर्जुन अकादमी व मैथ्स ऑन लाइन दोनों पर उदाहरण देखे थे |मैं बार बार गलती कर जाती थी |ठीक से समझ में नहीं आया |”
“अरे ये तो मेरी मम्मी ने भी बताईं थीं |उन्होंने कहा था इन दोनों साईट्स पर अच्छा समझाया है|   
“तुम्हें समझ में आया ?”
“नहीं कुहू ,रात डिनर लगने तक सवाल किये पर सारे सवाल सही नहीं लग पाते थे |खाने के समय मैंने दादाजी से पूछा कि ३ मजदूर ४ दिन में एक दीवार बनाते हैं तो ६ मजदूर उस दीवार को कितने दिन में बनायेंगे ?दादाजी ने बताया कम लोग काम करेंगे  तो उन्हें ज्यादा समय लगेगा, अतः गुणा करेंगे|  ज्यादा लोग मिलकर काम करेंगे तो जल्दी कर लेंगे, अतः भाग करना होगा |है न आसान |
कुहू की आँखें भर आयीं, घर में किससे पूछे अपने सवाल ?

१३-०८-२०१५ 
मनीषा 

Tuesday, 11 August 2015

हाइकू समझ

                 हाइकू समझ



       
    १
मित्र हैं वही   
जो न तोड़े विश्वास
शेष तो साथी
    २
दूसरों पर 
न करो दोषारोपण
यही बहुत
    ३
परोपकार
खुशबू चन्दन
करूणा बसी
    ४
निराश न हों
असफलता देती
प्रेरणा नई
    ५
धन प्राप्ति से
दरिद्रता न मिटे
वित्तेष्णा छोड़ो
      ६
खरीददारी में
खुश होने का भ्रम
पाले रईस
     ७
जुंबा पर आये
पुरानी कई यादें
प्यार बढायें
     ८
कह के बात
खुले मन की गांठ  
अपने आप
    ९
माँ का गुस्सा
क्रोध नहीं प्यार था
अब समझा