Monday, 20 April 2020

लॉकडाउन केअनुभव भाग 3


 लॉकडाउन का अनुभव भाग ३
मेरी नयी सहेली
आजकल जहां जाओ ......ओफो.....जाओ का मतलब...अब इस लॉकडाउन में जा ही कहाँ सकते हैं.... मुल्ला की दौड़ मज्जिद तक भी नहीं रह गई है  ..... सिर्फ फेसबुक से व्हाट्सेप और व्हॉटसेप से फिर फेस बुक| जहां नज़र डालो सब की सहेली एक ही हैं जो सबका काम करती है| विद्वान लोग कह गए हैं जो सबका दोस्त है वो वास्तव में सच्चा मित्र नहीं हो सकता| जितने भी साहित्यिक ग्रुप हैं सबके एडमिन बार बार अपने मेम्बर्स से हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं कृपया आप अपनी बात या प्रतिक्रिया साफ़ साफ़ शब्दों में लिखिए, प्रतीकों या चित्रों का सहारा मत लीजिये| व्हाटसेप पर एक ने ये कार्टून भी भेजा... लगता है कि हम फिर से पाषाण युग में आ गए हैं जहाँ आदिम मानव लिपि न होने के कारण  गुफाओं में भित्ति चित्र बनाता था थोड़े दिन में हम फिर उसी युग में आ गए है| पता नहीं क्यों इस लॉकडाउन के समय में इसका प्रयोग और बढ गया है| दो शब्द लिखने में इतना कष्ट .......तकलीफ तब और बढ़ जाती है जब अगला आपको शुभकामनाएं भी इनके ज़रिये दे और आपको धन्यवाद देना पड़े | मुझे आखिर समझ में नहीं आ रहा है लोग इसे इस हद तक पसंद क्यों कर रहे हैं | इसके इस्तेमाल के पीछे का फंडा क्या है? मैंने बड़ी मेहनत करके थाई डिश बनाई, फोटो भेज दी बच्चों को, बिटिया का जवाब..... जीभ निकालती हुई दो स्माइली आ गयीं| बहू ने कम से कम इतनी लाज रखी कि “वाह मम्मी”  लिखकर ताली का चिन्ह बनाया| गुस्से में आकर मैंने पहली बार मुक्का दिखाया| बहू ने तुरंत मुंह पर हाथ रखा चेहरा भेजा| बेटी मन की बात शायद समझ गयी उसने फोन किया| क्या हुआ मां थाई डिश बनी देखकर हम लार टपका रहे हैं और तुम मुक्का दिखा रही हो| बड़े रूखे से बोली --वो सब छोड..... तू ये बता.... आजकल सब लोग प्रतीक चिन्हों का उपयोग कर रहे हैं इसके बारे में क्या लगता है तुम्हें? बहुत अच्छा है मां.... कम समय में हम अपनी भावनाओं को इन इमोजीस के द्वारा कह सकते हैं। आप एक काम करिये -  गूगल पर “इमोजिस” लिखिये, सब मिल जाएगा| बस फिर क्या था.... तुरंत फोन काटा। मन ही मन कहा अच्छा ये महारानी इमोजी हैं  जिनके पीछे दुनिया पागल है  .....आज निपट ही लेती हूँ  ....गूगल पर  इमोजी लिखा और पूरा बही खाता सामने ...इमोजी--– भावना, वस्तु या प्रतीक का दृश्य प्रतिनिधित्व है। ये कार्टूनी अभिव्यक्तियां हैं। ये परिवार, इमारतों, जानवरों, खाद्य वस्तुओं, गणितीय प्रतीकों को दर्शाती है। इसका उपयोग अनौपचारिक बातचीत तक ही सीमित होता है, औपचारिक बातचीत में इसका इस्तेमाल नहीं ही करना चाहिये। दोस्तों और परिवार के सम्पर्क में रह्ने के लिये जितने भी लोकप्रिय सामाजिक नेट्वर्क जैसे कि फेसबुक, ट्विटर, इनस्टाग्राम, और व्हाट्सेप हैं, सभी में ये मौज़ूद है ..........मैं पढ़ती चली गयी और थोड़ी थोड़ी शांत होती गयी| ये तो पूरी विधा ही है जो पूरे विश्व में सर्वमान्य है| जापान में इसका जन्म हुआ था| एक स्माइली बनाने में पूरी खोजबीन की जाती है तब उसे मान्यता मिलती है| इमोजी, भाषा की सीमा में नहीं बंधी है| हर व्यक्ति इसे देखकर ही आपकी भावनाओं को समझ लेता है| पढ़ ही रही थी कि व्हाट्सेप मैसेज की घंटी ने ध्यान बटाया..... देखा तो ननिहाल के ग्रुप पर खेल आया| मुहावरे पहचानिए ... उदाहरण के तौर पर एक मगरमच्छ और एक आँख से आंसू गिरता चेहरा बना था उत्तर लिखा था घडियाली आंसू बहाना| बस फिर क्या था बचपना जाग उठा..... ध्यान से एक एक इमोजी देखती गयी और उत्तर लिखती गयी इसमें विभिन्न भावनाएं व्यक्त करती स्माइली, तरह तरह की इमोजी थीं  ....... प्रकृति के दृश्य, पेड़ पौधों की, खाओ पियों वाली, यात्रा व उनके स्थानों की, विभिन्न वस्तुओं व प्रतीकों की..... सब मिली जुली इमोजिस थी| समय ज़रूर लगा पर बीसों मुहावरे हल कर लिए| सारा गुस्सा व चिड़चिड़ापन  दूर हो गया| अभी तक तो मैं अकेले अकेले सुडोको व वर्ग पहेली भरती आई थी ताकि इस लॉकडाउन के समय में मानसिक व्यायाम भी होता रहे| अब ये नया खेल मिल गया| सारे ग्रुप टटोले जहाँ पर इमोजीस के साथ खेल पोस्ट हुए थे  ....देश के नाम ,शहर के नाम, पिक्चरों के नाम, गानों की पहली लाइन बताइए| पहले तो मैं इमोजी देखकर ही आगे बढ़ जाती थी पर अब हर रोज मेरा कुछ समय इसमें जाता और मज़े की बात यह थी कि मैं खुद इन इमोजीस का प्रयोग अनजाने में ही करने लगी| हुआ ये कि एक गणित का सवाल बहू ने डाला----                              
तीन गुड़ियों का जोड़  =२१
तीन सितारों का जोड़ =१२
तीन डंडों का जोड़ =१५
तो बताइये एक गुड़िया +एक डंडा *एक सितारा = ? जल्दी से हल करके भेजा उत्तर आया.... नहीं| मैंने कहा ..यही होगा गलत नहीं है| मम्मी गुड़िया के हाथ में क्या है? ध्यान से देखिये ....ओहो डंडा व सितारे दोनों मैंने तुरंत सिर पर हाथ रखी स्माइली भेजी| हल किया तो फिर गलत| अब क्या हुआ? तीन डंडों को ध्यान से देखिये..... बीच वाले डंडे में दो डंडे चिपके हुए हैं| हे भगवान्! मेरे दिमाग को क्या हो गया है रोज़ बुक मार्क बनाते समय ड्राइंग बनाती हूँ फिर यह मेरी निगाहों से कैसे छूट गया...... कितना सूक्ष्म अवलोकन करना पड़ता है| इतनी मेहनत करवाई बहूरानी, कुछ इनाम मिलेगा.... लिखने की देर नहीं .....तुरंत चॉकलेट आइसक्रीम की इमोजी हाज़िर| करोना वायरस ने मुझे पकड़ लिया तो? जवाब में जीभ निकाली इमोजी व कान पकड़े स्माइली आई| इस तरह मैं अपने परंम्परागत खेल ताश, लूडो, कैरम सब भूल कर इमोजी में ही खो गयी| अनौपचारिक रूप से अपनी भावनाएं इन्हीं के ज़रिये व्यक्त करने लगी| अब मेरी यह नयी सहेली चुपके चुपके मेरे दिल में जगह बनाती जा रही है| मुझे याद आया कि देखो मैंने फेसबुक व यू-ट्यूब पर कितने ही विदेशियों से क्रोशिया, बुनाई, क्राफ्ट, विभिन्न देशी- विदेशी व्यंजन सीखे और मैं उन्हें धन्यवाद देने की बजाय खाली लाइक करके छोड़ आई हूँ| अब कमेन्ट में जाकर इन इमोजिस से विजय का हाथ, तालियों वाला हाथ, हाथ जोड़कर धन्यवाद ,कठिन परिश्रम करके सफल होने पर तनावपूर्ण बाइसेप्स की इमोजी भेजकर अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकती हूँ| यही नहीं दुःख ,पछतावा, चिंता, उलझन, अस्वीकृति, खराब अनुभव भी बता सकती हूँ जिसके लिए बस एक इमोजी ही काफी है| खाली यही नहीं, शैतानी भरी इमोजी भी है इसमें तो ..... दोस्तों के मज़ाक समझ कर मूर्ख भी बन सकती हूँ, उपहास उड़ा सकती हूँ, मजाकिया बात कहकर चुप रहने का इशारा कर सकती हूँ| कितना कुछ कर सकती हूँ..... बिना कुछ बोले सब बोल सकती हूँ .... वाकई कमाल की चीज़ है ये इमोजी| इस लॉकडाउन से एक फायदा तो हुआ बच्चों ने मेरे दिमाग में लगा जाला तो साफ़ कर दिया| मैं आजकल की प्रचलित “इमोजी की भाषा” सीखने में परफेक्ट तो नहीं हुई पर बेमतलब की गलतफहमियां दूर हो गई और दूर बैठे बच्चों के और पास आ गयी| अब सच में बच्चों की मजबूरी भी समझ में आई| घर बैठ कर भी घर व बाहर दोनों का काम भी कर रहे हैं और माता पिता की देखभाल भी और साथ में अपनी मन की बात भी बता कर, दूरी का अहसास भी कम कर रहे हैं| मैं भी शान से कह सकती हूँ-- थोड़ी देर से ही सही, मैंने भी इमोजी को सहेली बना लिया है| अब मैं आपकी भावनाएं समझ भी लूंगी और अपनी बता भी दूँगी|
इस लॉकडाउन का अनुभव-----
जिसे मन स्वीकारे वो सुख और जिसे अस्वीकारे वो दुःख,
सारा खेल हमारी स्वीकृति व अस्वीकृति का ही तो है|
आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार है 
मनीषा सक्सेना
प्रयागराज           

3 comments:

  1. वाह बहुत बढ़िया

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  2. बहुत बढ़िया...इमोजीस ने हमेशा ही हमें fascinate किया है। कुछ न कहते हुए भी बहुत कुछ कह जाना। जो शब्द नही कह पाते, बहुत ही सटीक तरह से एमोजिज़ कह जाती हैं। गागर में सागर की उपमा, उपयुक्त है इनके लिए। अच्छा लगा आपको पढ़कर..😊😊

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    1. सही कहा आपने इससे पता नहीं क्यों मैं अपना नहीं पाई थी इस लौकडाउन में इससे मेरा परिचय हुआ अब मज़ा आ रहा है।

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