लघुकथा ३२
मम्मी पापा रेस्तरां
दादी आखिर ये लौकदाउन कब तक चलेगा हम लोग खेलने भी नहीं जा पा
रहे ना ही कहीं पिकनिक पर, कम से कम रेस्तरां ही खोल देते हम लोग खाना ही
खा आते| जो लोग फंस
गए हैं उन्हें भी तो सरकार खाना खिला रही है
खाने के पैकिट्स बाँट रही है| मम्मी पापा भी दिन भर काम करते हैं घर का और
ऑफिस दोनों का | वो भी थक जाते हैं|
दादी लीजीये पेपर आ गया
इसमें ऐड के जो कागज़ हों मुझे दे देना प्लीज़ ..... मैंने कई चीजें बनाना सीखी हैं
|”अरे बच्चों सुनों सुनों..... हमारी छत पर “मम्मी पापा रेस्तरां” खुला है| सन्डे
की रात को ७ से ९टाइम है तुम लोग जाओगे
क्या” “हाँ हाँ हम सब जायेंगे मैं अभी मम्मी पापा को बताती हूँ” ख़ुशी से पागल होकर
मिन्नी दौड़ी,रूककर मुड़ी “पर दादी पर आप तो छत पर कैसे जाओगी ?” “कोई नहीं मेरे लिए
पार्सल करके ले आना|” “ठीक है दादी, रविवार
को हमचारों लोग जायेंगे| भैया मम्मी कह रही हैं आज ही तो सन्डे है और अपनी छत पर
ही तो है, हम दोनों अकेले जा सकते हैं| मटक मटक कर तैयार होने लगी|
ये लीजीये दादी आपका पार्सल, आज के मेनू
में केवल साउथ इन्डियन फ़ूड ही था| अच्छा बैठो बैठो........शुरू से बताओ क्या क्या
हुआ......दादी खाने के समय साढे सात बजे जब हम ऊपर पहुंचे और दरवाज़ा खोला तो पूरी
ड्रेस में वेटर ने हम लोगों को कहा “वेल्कम टू मम्मी पापा रेस्तरां”| मुंह पर
मास्क लगा था, हाथ में सफ़ेद दस्तानें थे| “आप लोगों ने अपनी टेबल बुक की है?” “
नहीं |” “कोई बात नहीं, टेबल खाली हैं| आप
लोग कहीं भी बैठ सकते हैं| हम लोग बीच वाली टेबल पर जिसमें खूब सारे गुब्बारे सजे
हुए थे, उस पर बैठ गए| वेटर ने सैनीटाईज़र से हैण्ड वाश कराया, फिर मेनू कार्ड दिया
और कहा- आज की स्पेशियलटी साउथ इन्डियन फ़ूड है| हम लोगों को वेलकम ड्रिंक में रसम दी | हमने नारियल शेक और चिप्स स्टार्टर में
ऑर्डर किये| खाने में मैनें इडली साम्भर, भैया ने मसाला डोसा लिया| और पता है दादी
तीन तरह की चटनियाँ थीं| वेटर ने कहा ग्रीन, रेड व सफ़ेद नारियल की चटनी मेनू के
साथ फ्री हैं| खाना ख़तम करने के बाद हमसे पूछा गया कोई स्वीटडिश लेंगे सर? आज की
स्पेशियल्टी है .....बासुंदी ,फ्रूट क्रीम विद जैली,कोकोनट केक विथ होट चौकलेट,|
हमने पूछा कि आइसक्रीम है? वेटर ने कहा वायरस सीज़न में नो कोल्ड डिश| हम लोगों ने
फ्रूट क्रीम खाई|वेटर ने पूछा “कुछ और चाहिए आपको?”हमने कहा नहीं तो पूछा बिल ले
आऊँ ?इतने में शेफ़ रिमार्क बुक लेकर आये और पूछा खाना कैसा लगा?हमने बुक में ५
स्टार दिए |भईया ने कहा मैं नीचे जाकर पैसे लेकर आता हूँ शेफ़ व वेटर दोनों ने कहा
नो नो पहली बार हमने खोला है इसलिए ये फ्री है फिर दोनों ने अपनी कैप व मास्क
उतारे ......तो पता है दादी....... कौन थे वो दोनों...... मम्मी पापा ,,,,,,मम्मी
वेटर बनी थी और पापा शेफ़ और दोनों ने कहा इस लौकडाउन पीरीयड में हर सन्डे ये “मम्मी
पापा रेस्तरां” खुलेगा |
स्वरचित
मनीषा सक्सेना,प्रयागराज
Bohot hi sundar rachna:)
ReplyDeleteधन्यवाद। आप कृपया अपना परिचय दें।
Deleteबढ़िया वर्णन।मुझे भी इस रेस्तरां में खाने का मन कर रहा है।मीनू ने मुंह में पानी ला दिया।
ReplyDeleteधन्यवाद पीयूशा
Deleteबहुत अच्छा वर्णन।
ReplyDeleteधन्यवाद सौम्या।
DeleteBahut badiya 👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद जी। कृपया आप अपना परिचय दें।
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