लॉकडाउन के अनुभव
आजकल फोन से जब भी किसी
से बात होती है तो हर व्यक्ति घर में बंद होने की शिकायत करता है काम की अधिकता का
रोना रोता है| करोना वायरस से
बचने के लिए इस एकमात्र उपाय लौक डाउन ने आखिर हमको
दिया क्या? हम इस वायरस से बच
गये तो हम इसे ही नकारना शुरू कर दें ये तो सही नहीं है ...........सोचने पर मैं
भी मजबूर हुई तो मैंने ये महसूस किया कि जो हम भूल चुके थे या कभी जो प्राप्त करने
की इच्छा रखते थे उसे पाने का मौक़ा इस लॉकडाउन ने दिया है|
भाग एक..... सुबह से मुलाक़ात
साठ साल की उम्र हो गयी पर
सुबह की नींद क्या गहरी होती है ये कोई मुझसे पूछे| प्यारी मीठी नींद, सुन्दर सपने..... जिसमें ऊंचे पहाड़, जंगल, काले घने बादलों के
दृश्य, बादलों के बीच से
झांकता सूरज का गोला, लालिमा लिए हुए
आकाश, सूर्य की सुनहरी
किरणें, गाहेबगाहे सपनों
में आते हैं| इन सपनों को साकार
करने के लिए हम किसी हिल स्टेशन पर भागते दौड़ते, पैसे खरचते, नींद गवांते तमाम लम्बीं यात्रा के कष्ट सह्ते, सही मुकाम तक
पहूँचकर सूर्योदय के दृश्य को मन भर कर देख पायें। देखना तो दूर, कैमरे में पूरी तरह
कैद भी नहीं कर पाते थे कि कभी बादलों का डेरा उसे घेर लेता, कभी पानी बरस जाता,तो कभी बर्फ़बारी होने से
होटल की खिड़की पर बैठकर किस्मत को कोसते ही रह जाते, लौट कर बुद्धू घर
को आ जाते| फिर वही रोजमर्रा
की ज़िन्दगी शुरू -----सुबह सुबह अजान की तेज़ आवाज़ हो या फिर प्रयाग स्टेशन पर की
जाने वाली उद्घोषणा, बगल की सड़क से
गुजरते हुए स्कूल की बसों का हार्न हो या फिर सबसे पहले पानी भरने के लिए खोले गए
पानी के पम्प की आवाज़ या फिर घडी के अलार्म से एकदम हडबडा कर उठना|
भला हो पिछले १५ दिनों से लगे लॉकडाउन का जिसके
कारण ये आवाजें गायब हो गयीं हैं| सपनों में आने वाले वो सुन्दर नज़ारे जिन्हें मैंने अपनी आँखों से देखे व महसूस करना चाह रहे
थे वे अब सब दिखने लगे हैं|
आजकल सुबह की नींद
कोयल के कूकने या फिर खिडकी पर चिड़ियों की चहचहाट से खुलती है| इतने सालों से
विलुप्त कौए की आवाज़ मुझे बिस्तर से उठा देती है कि कोई आया क्या? अब सुबह न तो
कोई हडबडाहट न चिडचिडाहट .....बहुत ही
ताज़ा महसूस करती हूँ| बादलों के पीछे से
झांकती सूर्य रश्मियाँ सुनहरी सुबह बनाती हैं| सूरज की गुनगुनी धूप बदन को सहला जाती है| सुबह की बयार तनबदन में सिरहन जगाती है| सूरज का लाल गोला
प्रकाशमय दिन का आगाज़ करता है| चिड़ियों की चहचहाट से सुहावनी सुबह इठलाती हुई सी सुबह बन जाती है| ऐसी सुहानी भोर में, मैं बस परमात्मा
को नमन करके स्नेहिल सुप्रभात देने के लिए मन ही मन कृतज्ञता अर्पित करती हूँ| प्यारी सी सुबह का
अभिवादन करके ईश्वर को प्रणाम करती हूँ
साथ ही धन्यवाद भी देती हूँ कि हे ईश्वर.. तुझे स्नेह वंदन, जो स्वर्ग सा सुन्दर वातावरण इस धरती पर दिखाया| चमकीली सुबह को
देखने में मेरी आँखें अपने आप बंद हो जाती हैं और मैं बंद आँखों से वह लाल चमक
महसूस करके कहीं खो सी जाती हूँ| फिर वर्तमान में आकर दिनभर के कामों को सोचती हूँ| रोज़ ही कुछ न कुछ
करने की इच्छा भी यह सुबह, प्रेरणादायी सुबह
बनकर मुझे प्रेरित करती है|
ये सुबह का अनुभव
मैं बुकमार्क बना कर आप सबके साथ साझा करती हूँ| आशा करती हूँ हर रोज़, एक नया सवेरा नई उमंग
लेकर यूँ ही आता रहे| तरोताज़ा सुबह को हम
सब यूँ ही महसूस करते रहें|
आप सभी को स्वस्थ
जीवन की मंगलकामनाएं| कल फिर इस लॉकडाउन
में हुए एक नए अनुभव के साथ आपसे मिलूंगी|
मनीषा सक्सेना
प्रयागराज
खूबसूरत प्रातःकालीन वर्णन।
ReplyDeleteवाकई नया अनुभव।
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