सांवरा सलौना
मैं तो छोटा छौना हूँ,
जब मन आये उठता हूँ,
जब मन आये सोता हूँ|
बात करना है मुझे पसंद,
चुप बैठना सख्त नापसंद|
हूँ तो आखिर छोटा बच्चा,
करता काम खरा औ सच्चा|
सब लोग मुझसे बातें करते,
अपने जी को हलका करते|
चाहे बड़ा हो चाहे बच्चा
टॉफी लाता मेरे बहाने,
बढ़ी‘शुगर’ में भी मिठास पा
लगते हैं सब बात बनाने|
शिकवे गिले दूर करते हैं,
जो ऐंठें ऐंठें रह्ते हैं|
दूर दूर रह करके मुझसे,
देखें वे कैसे बचते हैं?
फेसबुक या मोबाइल पर
फेस मेरा ही वे पायेंगे,
मुझसे रह कर अलग भला
बोलो तो वे कहाँ जायेंगे?
करते-करते काम हमारा,
माँ तुम बन गयीं मशीन|
लेकिन साधारण न होकर,
समझो अपने को मिल्कमशीन|
हैं फायदे इसमें बहुतेरे,
रोग न कोई मुझको घेरे|
पीत शीत से मुझे बचाती,
दूध पिलाकर स्वस्थ बनाती|
माथे पर प्यारा सा एक,
डिठौना तुम, मुझे लगाती|
बन बैठा मैं सबका खिलौना,
प्यारा सरल सांवरा सलौना|मनीषा सक्सेना
सच्ची सलौनी रचना।
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