असुरक्षा
रात में होने वाली पार्टी के लिए सोच रही थी कि क्या पहनूं---नई सिलवाई ड्रेस
या ईवनिंग गाउन जैसा कुछ कि पतिदेव की कड़कती हुई आवाज़ कान में पड़ी “सुनो, आज ज़रा
ढंग से तैयार होना, कुछ भी पहन लेती हो |”
“हाँ बाबा हाँ ,हर बार ढंग से ही तैयार होती हूँ, तुम्हें तो खुश होना चाहिए
कि तुम्हारी बीबी पर प्लाजो से लेकर साड़ी तक, हर तरह की ड्रेस अच्छी लगती है|”
“किसी को उलटा सीधा बोलने का मौक़ा ही नहीं मिलना चाहिए|”
“दूसरे का मुंह थोड़े ही पकड़ सकते हैं जो जैसा होता है उसके मुंह से वैसे ही
बोल निकलते हैं |”सब तुम्हारी तरह थोड़े ही न हैं अच्छा लगेगा तब भी मुंह से बोल न
फूटें|”
“बोल तभी निकलते हैं जब --------बुदबुदा कर रह गए| भंगिमा ऐसी कि कच्चा ही चबा
जायेंगे|”
“भगवान् का ही दिया रंगरूप है--- मैं क्या कर सकती हूँ? ऐसी हूँ----- तो हूँ|”
“मेरी बीबी को कोई कुछ भी बोले ये मैं सहन नहीं करूंगा| दूसरों से मुझे क्या करना
है वह उसकी अपनी सोच है|”
“यही तो मैं भी कह रही हूँ ,तुम बेवजह परेशान हो रहे हो|”
“पिछली बार देखा नहीं था तुम्हारी उस ड्रेस पर------ मेरे सहकर्मी कैसी तुम्हारी
प्रशंसा कर रहे थे ,कोई ड्रेस की तारीफ़ करता ,तो कोई उम्र को मात देने की बात करता
,चेहरा मेरी तरफ और नज़र भाभीजी पे| दो किशोरों की मां हो--- कॉलेज की ब्यूटी क्वीन
नहीं |”
“चलो खुश हो जाओ, ४५ साल की उम्र में भी तुम्हारी बीबी इतनी कमसिन दिखती है, तभी
तो सब तुमसे जलते हैं |पत्नी का ख़याल रखने की टिप्स भी, तुम्हीं से तो पूछते हैं |”सच
पूछो तो मुझे तो दिल ही दिल में अच्छा ही लग रहा था, अपनी तारीफ़ सुनके|”
“ऐसे लोगों को तो मैं एक निगाह में ही पहचान जाता हूँ|” “तारीफ़ करने का भी एक
ढंग होता है|”
“तुम भी ना ------ज्यादा ही भावुक हो रहे हो|” साल्ट एंड पेपर बालों का ढीला
सा जूडा बनाते हुए बोली |
“मेरी तारीफ़ क्यों होती है उसे तुम नहीं समझोगी| मक्खन मारने के बहाने हैं सब”
“किसी के कहने से हम वैसे ही थोड़े न हो जायेंगे, जैसे होंगें वैसे ही तो
रहेंगे| अगला तारीफ़ के बोल ही बोल रहा है न ----- |” आसमानी शिफौन की साड़ी पे मोती
की माला पहन कर तैयार हो गयी |“हाँ तुम्हारी ये बात सही है, किसी को बेमतलब बातें
बनाने का मौक़ा ही नहीं देना चाहिए|”
“अब चलें--------मेरे मिस्टर अम्बानी”
चलते चलते एक सरसरी सी निगाह डालते हुए आगे बढ़कर कार का दरवाज़ा खोल दिया| पत्नी
की ड्रेस को लेकर हुई असुरक्षा का शमन जो हो चुका था|
मनीषा सक्सेना
इलाहाबाद
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