दोस्ती की लक्षमण रेखा
“आज ऊपर क्यों”कुत्ते टॉमी
ने ठूंठ पर बैठी मिन्नी बिल्ली से कहा|
“सावधानी हटी दुर्घटना घटी”
“दोस्त हैं, अब हम सब”
“सब कौन? अच्छा------ मालिक
|”
“मैं शिकार पर साथ देता हूँ
खोजी प्रवृति का हूँ ,सूंघने का वरदान है इसलिये काम का हूँ|”
“मेरा काम साथ निभाना हैं,
मूड भांप कर ही आगे बढती हूँ |”
“इतना स्वामी भक्त हूँ तब
भी कई बार लात या डंडा खा जाता हूँ |”
“हाँ गुस्से या अवसाद में
कभी कभी ऐसा हो जाता है| तुमने देखा नहीं ऐसे में मैं छुप जाती हूँ |मालिक का मूड
ठीक होने पर ही बाहर आती हूँ |”
“मैं तो स्वामी भक्त हूँ,
कैसा भी मूड हो सामने ही बैठता हूँ”
“इसीलिए डांट मार भी जबरन
ही खा जाते हो |”
“ये तो चालाकी हुई, अच्छा
अच्छा लिया कड़वा-कड़वा दुर-दुर |
“तभी तो तुम चरणों में और
मैं गोदी में| आखिर शेर की मौसी यूँ ही नहीं कहलाती हूँ परिस्थिति को भांपने की
क्षमता है मुझमें | मालिक के सामने वाले रास्ते से निकाल जाऊं तो वो भी रूक जाते
हैं पर तुम नहीं| इसलिये दोस्तों में भी सावधानी ज़रूरी है|
मनीषा सक्सेना
इलाहाबाद
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