अनकहा
बेटे बहु ने बड़े इसरार करके
माता- पिता को अपने मेट्रो शहर में बुलाया |घर में हर प्रकार की सुविघाएँ थीं| फोन
पर ही सब राशन-पानी, सब्जी– भाजी घर बैठे ही मिल जाती है |कभी हरी सब्जी लाने का
मन किया भी तो बेटा ही कहने लगता आज तो लगता है आप पूरी मंडी ही उठा लायें हैं
|नवां महीना लगने पर मांजी बहू को आराम करने को कहती तो वह टोकाटाकी में शामिल
होता| बहु हंसकर कहती आपका पोता आयेगा ना तो वह आपको चैन से बैठने नहीं देगा और
मांजी पोते का सपना देखा करतीं |
समय पर पोता ही हुआ, मानों सपना साकार हुआ, मांजी
ने सारा काम अपने पर ले लिया |राततक थक के चूर हो जाती पर पोते में मगन रहती, मां
के पास तो बच्चा सिर्फ दूध पीने जाता| सारे समय बाबा-दादी और उनका खिलौना-- प्यारा
सा पोता|देखते ही देखते सालभर होने को आया, बेटे बहु की टोकाटाकी बढ़ने लगी –बच्चे
को अपनेआप खाने दीजीये ,ज्यादा गुद्दकड़ ना बनाइये ,अपनेआप खेलने दीजीये, चलते समय
गिर जाए तो अपनेआप उठने दीजीये आदि आदि| शूशू –पौटी के लिए भी बच्चे को डांट पड़ती
तो दोनों का कलेजा मुंह को आ जाता |
शाम को बेटा बहू बहुत खुश खुश घर आये, आते ही
बोले -------
“मां मंदिर में प्रसाद
चढ़ाइए, आपके पोते का एडमिशन शहर के नामीगिरामी डे-स्कूल में हो गया है |अब हम लोग
शांति से अपने काम पर लौट सकेंगे|”
“इतना छोटा बच्चा ------और
------स्कूल -----|” दादी का मुंह खुला रह गया |
“मांजी आप बिलकुल चिंता मत
कीजीये ५ बच्चों पर एक आया है, साथ के बच्चों के साथ खेलने से उसे अच्छी कंपनी भी
रहेगी |”
“पूरे पांच साल की छुट्टी
हो गई |पांच साल का होने पर अपना काम अपने आप करने लगेगा|”
“इतना छोटा ----कैसे ------दिन भर तुम लोगों को चिंता लगी रहेगी|”
“मां-------लड़की थोड़ी ना है
जो दिनभर चौकीदारी करनी है, पोता है पोता--- तुम्हारा|” “तुम भी चिंता करना छोड़ दो
|”
“बेचारा अभी से स्कूल के
चक्रव्यूह में फंस जाएगा |”
“नहीं मां, शनिवार इतवार की
छुट्टी के साथ और भी अगल-बगल छुट्टी होगी
ही, आप लोगों के बिना तो रह ही नहीं सकते, खून तो आपका ही है ना ----------|”
बाबा ने मोबाइल पर वापसी का
टिकिट कटवा लिया|
मनीषा सक्सेना
इलाहाबाद
No comments:
Post a Comment