मम्मी का जन्मदिन
मम्मी का जन्मदिन हम लोग ७ जुलाई को मनाते आये हैं |इस दिन मेरे ताउजी यानी मम्मी के जेठ, व मेरी बेटी यानि की मम्मी की नातिन का जन्मदिन भी होता है |अतः मैंने जबसे होश सम्भाला है तबसे हम सब मम्मी का जन्मदिन ७ जुलाई को ही मनाते आए हैं |
पिछले दिनों बैंक में अकाउंट खुलवाते वक्त मम्मी का बर्थ सर्टिफिकेट चाहिए था तो हाईस्कूल का सर्टिफिकेट मैंने निकाला तो देखा उसमें जन्म की तारीख ६ जुलाई लिखी है |मुझे बड़ा अचरज हुआ ,मम्मी से पूछा तो बोली "हाँ सर्टिफिकेट में तो ६ ही लिखी है |""तुम्हारा जन्मदिन ६ को है या ७ को?""अरे बेटा पता नहीं, छोटे थे तो जन्मदिन मनाया ही नहीं गया|शादी होकर आये तो भाईसाहब के साथ सब मनाने लगे |इंदौर में मंजू मेरी सहेली की भी ७ को ही होती थी तो साथ साथ मनाते थे ,फिर एषा मेरी नातिन ७ को हुई तो अब उसके साथ मनने लगी |"वाह !मेरी मां |धन्य हो तुम |जीवन के विभिन्न पडावों में सबका साथ निभाती जा रही हो |"अच्छा एक बात बताओ तुम्हारा मन नहीं किया की यदि तुम्हारा जन्मदिन ६ को है तो ६ को ही मने |"मम्मी बड़े मुस्कुरा कर बोली" क्या फर्क पड़ता है ६ को मनाया या ७ को ,सबका साथ ज्यादा ज़रूरी है---सब एक जगह इकठ्ठे हों हँसे- बोले ,खायें पीयें ,मस्ती करें और क्या चाहिए |"पापा इतनी देर से चुपचाप बैठे हैं आप बोलते क्यों नहीं |"भाई मुझे याद है शादी में जब जन्मपत्री आई थी तो उसमें ७जुलाई लिखा था ,हाईस्कूल में ना जाने कैसे ६ जुलाई लिख गया है |जन्मपत्री में जो लिखा है मेरे हिसाब से वो सही होना चाहिए|बारहाल जो हो अपने को तो दोनों दिन पार्टी मिल जायेगी |"वे चितपरिचित अंदाज़ में हंसने लगे |
सच में मम्मी तुम्हारे विचार बहुत ऊंचे हैं ,जो कहती हो वो जिन्दगी में उतारती भी हो और इसीलिए तुम ख़ास हो ----------तुम्हारे जन्मदिन पर ये कार्ड मैंने बनाया है -----सादर समर्पित -----
मम्मी का जन्मदिन हम लोग ७ जुलाई को मनाते आये हैं |इस दिन मेरे ताउजी यानी मम्मी के जेठ, व मेरी बेटी यानि की मम्मी की नातिन का जन्मदिन भी होता है |अतः मैंने जबसे होश सम्भाला है तबसे हम सब मम्मी का जन्मदिन ७ जुलाई को ही मनाते आए हैं |
पिछले दिनों बैंक में अकाउंट खुलवाते वक्त मम्मी का बर्थ सर्टिफिकेट चाहिए था तो हाईस्कूल का सर्टिफिकेट मैंने निकाला तो देखा उसमें जन्म की तारीख ६ जुलाई लिखी है |मुझे बड़ा अचरज हुआ ,मम्मी से पूछा तो बोली "हाँ सर्टिफिकेट में तो ६ ही लिखी है |""तुम्हारा जन्मदिन ६ को है या ७ को?""अरे बेटा पता नहीं, छोटे थे तो जन्मदिन मनाया ही नहीं गया|शादी होकर आये तो भाईसाहब के साथ सब मनाने लगे |इंदौर में मंजू मेरी सहेली की भी ७ को ही होती थी तो साथ साथ मनाते थे ,फिर एषा मेरी नातिन ७ को हुई तो अब उसके साथ मनने लगी |"वाह !मेरी मां |धन्य हो तुम |जीवन के विभिन्न पडावों में सबका साथ निभाती जा रही हो |"अच्छा एक बात बताओ तुम्हारा मन नहीं किया की यदि तुम्हारा जन्मदिन ६ को है तो ६ को ही मने |"मम्मी बड़े मुस्कुरा कर बोली" क्या फर्क पड़ता है ६ को मनाया या ७ को ,सबका साथ ज्यादा ज़रूरी है---सब एक जगह इकठ्ठे हों हँसे- बोले ,खायें पीयें ,मस्ती करें और क्या चाहिए |"पापा इतनी देर से चुपचाप बैठे हैं आप बोलते क्यों नहीं |"भाई मुझे याद है शादी में जब जन्मपत्री आई थी तो उसमें ७जुलाई लिखा था ,हाईस्कूल में ना जाने कैसे ६ जुलाई लिख गया है |जन्मपत्री में जो लिखा है मेरे हिसाब से वो सही होना चाहिए|बारहाल जो हो अपने को तो दोनों दिन पार्टी मिल जायेगी |"वे चितपरिचित अंदाज़ में हंसने लगे |
सच में मम्मी तुम्हारे विचार बहुत ऊंचे हैं ,जो कहती हो वो जिन्दगी में उतारती भी हो और इसीलिए तुम ख़ास हो ----------तुम्हारे जन्मदिन पर ये कार्ड मैंने बनाया है -----सादर समर्पित -----
जन्मदिन की बहुत सारी शुभकामनाये
मनीषा

बहुत सूंदर
ReplyDeleteबहुत बढिय़ा।हम अपनी माँ के ऋणी हैं।
ReplyDeleteहर अवसर को खास बनाना-बचपन से अब तक देखा है।बेहतरीन कविता।
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