सुख
की चाहत
रीना
की शादी की बातचीत चल रही थी |घरवालों ने अच्छा घर वर ढूँढने के लिए ऑनलाइन
विज्ञापन निकाला |भाई के साथ रीना अपनी शादी के लिए साथी डॉट कॉम पर विज्ञापन देख
रही थी |रीना को कोई वर पसंद ही नहीं आरहा था |प्रारम्भिक जानकारी देखने की बाद ही
लाल बटन दबा कर ब्लॉक कर देती |भाई ने झींक कर पूछा “आखिर तुम चाहती क्या हो |” “भैया
ज्यादातर लड़के मेरी नौकरी व तनख्वाह के बारे में पूछते हैं या फिर मेरे चेहरे
मोहरे पर फ़िदा होते हैं |मैं कोई सुन्दर सी रूपया उगलने वाली मशीन नहीं बनाना
चाहती हूँ |अपने घर में सुख शांति से रहना चाहती हूँ |इसकी कोई बात ही नहीं करता |”
“तो मिल गया तुम्हे ...बैठो और ढूंढो ,” कहकर भाई उठ गया |
“मुझे जब कोई अच्छा लगेगा तब बता दूंगी |”
“मुझे जब कोई अच्छा लगेगा तब बता दूंगी |”
एक विज्ञापन पर नज़र गयी जिसमें
भावी वर ने लिखा था सरकारी नौकरी है,औसत तनखा है,खुशमिजाज़ जीवनसंगिनी चाहिए |आजकल
की भेड़चाल से थोड़ा अलग सा लगा|हरा बटन देख कर बातचीत प्रारम्भ की ....
“हाय,मेरी
प्रोफाइल आपने पढ़ ली हो तो बातचीत करे” “अपने बारे में बताइये”
“मैं
बच्चों का डॉक्टर हूँ ,सरकारी नौकरी है ,बन्दा भी इलाहाबाद का ही है|” “आप” ?
“मैंने
भी ग्रेजुएशन करके एम.बी.ए. फायनेंस प्रोफेशनल में किया है ,इलाहाबाद के ही एक बैंक
में वित्तीय सलाहकार हूँ|”
“आप
डॉक्टर होने के नाते दिनरात मरीज़ ही देखते होंगे”
“ओ.पी.डी.
में लंच तक बच्चो को देखता हूँ लंच के बाद एम.बी.बी.एस के बच्चों को पढ़ाना होता है
|
“शाम
को फिर मरीज़ देखते होंगे ,विभिन्न नर्सिंग होम में जाना भी पड़ता होगा|”
“नहीं,
शाम मैं अपने लिए रखता हूँ |पढ़ना, घूमना, बागवानी करना ,आदि आदि|”
“आपभी
तो कुछ अपने बारे में बताइये|”
“अच्छा
लगा जानकर कि डॉक्टर होने के बावजूद भी आप शाम को अपने लिए समय निकालते है |मैं भी
बंधी बंधाई नौकरी करती हूँ बस ९ से ६ की |सुख शांति से रहना मुझे अच्छा लगता है |”
“अच्छा
तो सुख शांति से रहने के लिए आप क्या करना चाहती हैं|”
“चाहती
ही नहीं हूँ कर दिया है ,विदेशी बडे बैनर की कंपनी ,बड़ी तनख्वाह पर, कोल्हू का बैल
न बनकर, परिवार के साथ रहना पसंद किया है|”
प्रारम्भिक
जानकारियों के आदान-प्रदान के बाद वे दोनों आपस में अपने विचार थोड़े खुल कर बताने
लगे |
“मेरा
मानना है की पत्नी अपनी मानसिक संतुष्टि के लिए काम तो करे पर घर व बच्चों के पालन
पोषण को ज़रूर प्राथमिकता दे तभी परिवार सुखी रह सकता है |”
“मेरी
भी सोच कुछ आपसे मिलती है ,पति-पत्नी साथ साथ एक शहर में रह कर ही काम करे तो
जिन्दगी में शांति रहती है |दूरियां व पैसा थोड़ा कम हो, कोई दिक्कत नहीं पर चैन की
जिंदगी हो, ये ज्यादा ज़रूरी है |”
“हरेक
साधारण लड़की की तरह खाना बनाने व खिलाने का शौक है,विशेषकर त्योहारों को मनाना ,मन
में स्फूर्ति भरता है |”
“आप
साधारण नहीं असाधारण है आजके ज़माने में आप जैसे विचारों वाली लड़की विरले ही मिलती है | मुझे लगता है हम लोग अच्छे
दोस्त हो सकते है |”
“मुझे भी अच्छा लगा आप जैसे दोस्त से बात करके|”
“मुझे भी अच्छा लगा आप जैसे दोस्त से बात करके|”
“आपको
एक मज़े की बात बताऊँ,ग्रेजुएशन करते समय मेरे दोस्त मुझे कहते थे- तू तो हमेशा (MBBS)
मियाँ बीबी बच्चों सहित ही रहेगा|”
“मेरी
सहेलियां कहती है तेरा कुछ नहीं हो सकता- MBA (FP)मियाँ बीबी और फेमिली पूर्ण”
मनीषा
सक्सेना
इलाहाबाद
पैसे की रेस से हटकर,शांति को बताती,विरली कहानी।सुन्दर।
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