नया प्रोजेक्ट
आन्या कॉलेज से लौटकर आई और
सीधे ही बिस्तर पर लेट गई आठवां महीना पूरा हो चुका था| घर में कोई था भी नहीं और
पेट में भी हल्का हल्का सा तनाव लग रहा था |इतने में ही घंटी बजी, लगता है विनीत आ
गया |दरवाज़ा खुलते ही पेट को सहलाते हुए उसने पूछा “आज मेरा बच्चा क्या कर रहा है”
| “पता नहीं आज मैं उसकी तरफ ध्यान ही नहीं दे पाई| आज पहले क्लास थी, फिर
प्रेक्टिकल्स लेने थे| भाग-दौड़ ही रही| कॉलेज
में भी प्रसव से पहले बच्चों के कोर्स भी पूरे कराने हैं| सब काम मैं अकेले सम्भाल
नहीं पा रही हूँ| खैर ----तुम्हारा दिन कैसा बीता?नए प्रोजेक्ट का क्या रहा कुछ
आगे बात बढ़ी?”
“हाँ पैसों का इंतजाम तो हो
ही जाएगा, बस अपनी भागादौड़ी कम कर पाना थोडा मुश्किल है|मैं सब संभाल लूँगा |तुम
परेशान मत हो |”
“पर ये नया प्रोजेक्ट तुम
देर से----- मेरा मतलब है--- अपने बच्चे के थोड़ा बड़ा हो जाने पर ले लेते |”
“बच्चा तो अपना ही है
ना----डॉ.सहाब से भी मिला था ,कह रहे थे सहायता के लिए आया से अच्छा है घर के किसी
बुज़ुर्ग को बुला लीजीये उसकी देखरेख में आया की सहायता ली जा सकती हैं |”
“पता नहीं आज सुबह से ही
पेट में बहुत हलचल है क्लास लेते समय भी बीच बीच में बैठना पड़ता था”
“कोई बात नहीं, आराम से
लेटो| वो खुद अन्या के बगल में लेट गया और उसके पेट पर हाथ फेरने लगा|
“अच्छा तुम आँख बंद करो और थोड़ा सो लो |”
“छोटू आज तुमने मम्मा को
क्यों परेशान किया ,मम्मा को आराम करने दो, थक गई हैं न!”
“तुम तो ऐसे पूछ रहे हो
जैसे वो सुन रहा है|”
“श श ------ये मेरी और उसकी
आपस की बात है |तुम सो जाओ |” आन्या विनीत की तरफ करवट करके लेट गयी|आन्या के पेट
पर हाथ फेरते हुए कहा –“क्या हुआ बच्चे ,पापा से बोलो”
“मुझसे आज किसी ने बात नहीं
की, मैं बहुत गुस्सा हूँ|”
“पापा हैं ना, मैंने
तुम्हारे लिए रिमोट से चलने वाले खूब सारे खिलौने बनाए हैं|”तुम्हारी मम्मा ने खूब
सारी डॉल्स ,कपड़े, कहानी की किताबें वगैरह अलमारी में सजा दी हैं|
“मुझे कुछ नहीं चाहिए ,कोई
मुझसे बात नहीं करता ,कोई मुझे प्यार नहीं करता”
“आज मम्मा ने आपको खाना
नहीं खिलाया?”
“ठूस ठूंस कर खिलाया था पर
बात नहीं की, ना ही लाड़ किया |”
“देखो विनीत कितनी जोर-जोर
से हलचल हो रही है|”
“धीरे धीरे बच्चे, मम्मा सो
रही है न” विनीत ने पेट को पुचकारते हुए थपथपाया |हलचल थोड़ी कम हो गयी |”
“मम्मा तो आपसे कह रहीं हैं
कि वो अकेले मुझे संभाल नहीं पाएंगी |आप लोग मुझे कहीं भेज देंगे? मुझे डर लग रहा
हैं|”
“नहीं ,तुम हम सबके लाड़ले हो,मम्मा की डॉल हो|”
“मुझे डॉल नहीं बनना है, आप लोग मुझे छोटी छोटी डॉल्स के साथ घर में छोड़ देंगे|”
“पापा का नया प्रोजेक्ट हैं न ,पापा ऐसा कभी नहीं करेंगे ” विनीत ने पेट को चूमते हुए
कहा| “तुम बड़े होकर जो करना
चाहोगे मम्मा पापा तुम्हें सही सलाह के साथ पूरी सहायता करेंगे|”
पेट की हलचल आश्वस्त होकर
शांत हो गयी थी |
मनीषा सक्सेना
इलाहाबाद
बच्चे सच में बातें सुनते व समझते हैं।बहुत सुन्दर वार्तालाप।
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