बैड
टच
कामकाजी
बेटे बहु के पास आये हुए एक हफ्ता ही हुआ है |शनिवार इतवार तो सबकी छुट्टी होती है
|हँसते-बोलते, खेलते-कूदते, घूमते-फिरते बीत जाता है पर बाकी दिन इंतज़ार और सिर्फ इंतज़ार | सोमवार से शुक्रवार जब सुबह
५बजे से दिनचर्या शुरू होती तो पोती को देख कर कलेजा मुंह को आने लगता |इतनी छोटी
बच्ची और पीठ पे इतना सामान जैसे लाम पर जा रही हो | पहले स्कूल फिर डे स्कूल| शाम
६बजे माता पिता के साथ लौटती |अनुशासित इतनी कि आते ही सारी चीज़े यथास्थान रखती
|लाख कहो कि आजा दादी कपड़े बदलवा दें पर नहीं ,मम्मी के साथ कमरे में ही जाकर
बदलती |
आज मेरी बिट्टू ने क्या सीखा ?पूछते ही बस
शुरू हो जाती “क्ले की फिश बनाई”
“ट्रेफिक
लाईट का सिग्नल देखकर आगे बढ़ना चाहिए| रेड पर स्टॉप ,येलो पर वेट एंड सी ,ग्रीन पर
गो |”जानवरों के बच्चों को क्या कहते हैं ,जानवरों की बोलियाँ उन सब की नक़ल उतारी|
“
दादी आप जब बीमार पड़ जाएँगी तो कहाँ जायेंगी ?”
“डॉक्टर
को दिखाने”
“तो
ये लीजिये आपकी पर्ची”
“डॉक्टर
अंकल के पास जाए तो पर्ची लेकर बाहर बैठे ,जब आपका नाम बुलाया जाए तब अन्दर जाना
है |” “छोटे बच्चे मम्मी पापा के साथ अन्दर जाकर अपना चेककप कराएं| मम्मी पापा के
सामने खाली डॉक्टर अंकल ही आपके चेस्ट एंड थाइज़ देख सकते हैं|बाकी कोई इनको टच
नहीं कर सकता है |”सिर के साथ साथ तर्जनी को भी दायें बाएं हिला कर टीचर की नक़ल की
|
“ये
तो हम लोगों को भी नहीं बताया मम्मीजी ,आजकल सब स्कूल में सीखती है |”थोड़े गर्व से
बहु ने बिटिया की तरफ देखा |
“फ्राइडे
को ग्रेंड पेरेंट्स डे है | मैम हम लोगो को डांस सिखा रहीं हैं| दादी, मैम कह रहीं
थी गॉड के ऊपर जो सुपर गॉड होते हैं वो ग्रेंड पेरेंट्स होते हैं |” “दादी आप नेक्स्ट
वीक तक रुकेंगी न !सब बच्चों के ग्रेन्ड पेरेंट्स को टीचर ने बुलाया है |आप
प्रोग्राम देखकर ही जाइएगा |”
इतनी चटर पटर करने के बाद थोड़ी निंदासी
होने लगी| “आज छोटी बच्ची दादी पास सोएगी”|उसने मां की तरफ देखा| “हाँ बेटा सो जाओ
|दादी तुम्हें कहानी सुनाएंगी|” कहानी सुनाते हुए मैं उसके पैर हल्के से दबाने
लगी|दबाते दबाते जैसे ही मेरा हाथ उसके घुटने से ऊपर की तरफ आया, उसने मेरा हाथ
झटक दिया ..नो दिज़ इज बैड टच|
मैं मन ही मन सोचने लगी ममता का गुड टच
आजकल के ये बच्चे कैसे सीखेंगे और जानेंगे ?
मनीषा
सक्सेना
इलाहाबाद
मर्मस्पर्शी।सिमटती ममता और यंत्रवत शिक्षा की बानगी।
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