Monday, 9 September 2019

गपशप


गपशप
         मनबहलाव का सबसे सस्ता व सुलभ साधन है गपशप करना| गप्प मारने, गप्प उड़ाने, और गप्पबाज़ी,भारतीय पटल पर समाज में लोगों को जोड़ने का कार्य करती है|आज सेचार पांच दशक पहले चौपाल, घर की छतें,चाय की दुकान, तिराहे की चुंगी, नुक्कड़ की पान की दुकान सब गप्पबाजी के अड्डे हुआ करते थे| यहाँ पर हर रोज़ विद्यार्थीयों से लेकर नेताओं,अधिकारियों,नए पुराने वकीलों, टाईमपास करते कवियों व साहित्यकारों के जमघट लगा करते थे| इन्हीं अड्डों पर देश की राजनीति से लेकर क्रिकेट की गेंदबाजी या बल्लेबाजी तक की चर्चाएँ घंटों चलती थीं| हर व्यक्ति एक ही बात को विभिन्न हाव भावों से, घुमाफिरा कर, थोड़ा नमक मिर्च लगाकर –गप्प मारता ही नहीं, गप्प हांकता या गप्प उड़ाता भी था| इसीलिए हर व्यक्ति के लिए अलग अलग विशेषण होते थे जैसे---गप्पी, गपिया, गपडचौथ यानी कि बेकार की बकवास करने वाला, गपौडिया यानि कि अंड-बंड या उटपटांग बोलने वाला| मन बहलाव भी ऐसा कि आदमी पूरी तरह उसमें डूब जाए|
         गपशप का अगला दौर थोड़ा प्रतिष्ठित था| कॉफ़ी हाउस खुले, महिलाओं की घर घर किटी पार्टी चली, विद्यार्थियों ने स्कूल –कॉलेज की लायब्रेरी की बजाय कोचिग संस्थानों को अपना अड्डा बनाया| इन अड्डों का पता घर के सदस्यों को भी होता था| दोस्त की पत्नी से पूछो भैया कहाँ हैं तो वह समयानुसार अड्डे का पता बताती थी| इस बतरस में परनिंदा इतनी हावी रहती थी कि लगता था, छंदशास्त्र में निन्दारस, दसवां रस हो गया है| यही वो सोशल बौन्डिंग थी जिसमें मिलना जुलना रोज़ तो नहीं होता था पर विचारों का आदान प्रदान् करके मतभेदों को भी दूर किया जाता था| गपशप को अनावश्यक समय नष्ट करने के दायरे में भी नहीं रखा जाता था|
        पिछले एक दशक से गपशप के तरीके बदल गए हैं| बड़ी बड़ी गगनचुम्बी अट्टालिकाओं के फ्लैट में एक नया समाज उभरा है---आभासी समाज| यहाँ पान सुपारी के साथ गप्प सड़ाका नहीं होता, धौल धप्पे नहीं लगते, कानों को सुख देती गप्प, दिलोंदिमाग पर नहीं उतरती| इसमें शामिल हर व्यक्ति मोबाइल पर अपनी बात, लिखकर कहता है| दूसरे की बात पसंद आने पर, कुछ कहने की बजाय, की-बोर्ड पर अंगुलियाँ थिरकाता है और कान में इयरफोन ठूँसे रहता है| सोशल मीडिया में “भाभो” की जगह व्हाट्सऐप ने ले ली है| कार्यालयों में होने वाली गपशप में केंद्रबौस या उनके चमचे ही होते हैं जहाँ लिखित पंचायत होती है| इसमें हिंदी तो दूर की बात है अंग्रेज़ी शब्दों की भी टांग तोड़ी जाती है|
सोशल मीडिया के विभिन्न ऐप--- ट्विटर, लिंकड इन, फेसबुक, व्हाट्स ऐप, जानकारी के अड्डे बन गए हैं| बच्चे से लेकर बूढ़े, हर उम्र के लोग इसका उपयोग कर रहे हैं|एक ही छत के नीचे रहते हुए भी, आपस में बातचीत नहीं होती है|सुबह की दुआसलाम से शुरू होकर शुभरात्री तक व्यक्ति, मोबाइल पर ही उपस्थित होता है| हर व्यक्ति को हर क्षेत्र की सटीक जानकारी, सहजता से उपलब्ध होती है|घरेलू नुस्खा हो या तकनीकि जानकारी,व्यवसाय की साझेदारी हो या नौकरी की तलाश, बीमारी के कारण हो या उसका निवारण, कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं है| सारी जानकारी इस पर उपलब्ध है| आपको प्रश्न पूछने की देर है –अनजान व्यक्ति आपको उत्तर दे देगा| इस मंच पर गपशप अनौपचारिक न होकर सिर्फ औपचारिक होती है| इस तकनीकी क्रान्ति के पहले बतियाने वाला,गपियाने वाले के साथ सक्रिय साझेदार होता था और उसके समानांतर रहता था पर अब न कोई इतनी रोचकता से गप्प कहता है और न ही सुनने वाला उसमें इतना डूब पाता है|गप्पबाजी में जो असीम सुख मिलता था उसका अहसास की-बोर्ड पर नाचती अंगुलियाँ या इमोजी नहीं दे पाते हैं| मोबाइल की लत ने मैसेज व इमोजी के माध्यम से, बातचीत की बारीकियों को बदल दिया है| परिवार व दोस्तों के साथ बिताये जाने वाले ख़ास पलों को, हम खो रहे हैं| आजकल की गपशप, खाली जानकारी का बवंडर बन कर रह गयी है|आज गपशप का तरीका बदला है तो क्या ----गपशप स्थाई है| मनबहलाव के साधन के साथसाथ जानकारियों का पुलिंदा भी हो गया है| गपशप हमेशा से थी---- है -----और रहेगी |

मनीषा सक्सेना
G १७ बेल्वेडीयर प्रेस कम्पाउंड
मोतीलाल नेहरू रोड
प्रयागराज

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