सम्मान
ऑफिस
से लौटते हुए रीना ने फल लिए और रोज़ की अपेक्षा आधा घंटा जल्दी घर पहुंची ताकि फल
फ़्रिज में थोड़े ठन्डे हो जाए| घर में सास ने खूब सारी मठरी व आटे के लड्डू बना कर
रखे हुए थे| वैसे तो रीना कुछ नहीं कहती है, सास की भावनाओं का सम्मान करती है| पर
जबसे पति की शुगर की रिपोर्ट बार्डर लाइन पर आई है वह खाने पीने में बहुत सावधानी
बरतने लगी है|उसने बड़ी विनम्रता से सास से कहा “माँजी मैं जानती हूँ आपको खाना
बनाने, खिलाने का बहुत शौक है| आपके बेटे की खून की जांच में शुगर सामान्य स्तर पर
तो है पर उसकी अंतिम सीमा पर है अगर इससे ज्यादा बढ़ी तो इनको दवाइयाँ लेनी पड़ेंगी|अच्छा
होगा कि हम लोग चीनी, मैदा, घी-तेल से बनी, तली-भुनी चीजों का परहेज़ करे|”
“हाँ
हाँ परहेज़ करना हमेशा ही अच्छा होता है |”
“सोचती
हूँ आपने जो लड्डू मठरी बनाए हैं आस – पड़ोस में थोड़े थोड़े दे आऊँ|मेरी पड़ोसिनें तो
आपके हाथ के बने लड्डूओं की हमेशा याद करती हैं|फिर इनको भी सामने दिखेंगे तो एक
बार में दो तीन लड्डू खा लेंगे, हाथ रूकेगा नहीं| अब नुकसान करेंगे|”
“शुद्ध
घी में बनाए हैं ,ये नुक्सान नहीं करते हैं |”
“घी
ती घी ही है ना |लड्डू में तो घी साथ में चीनी भी है |आप ही सोचिये दोनों की
मिलाकर कितनी कैलोरीज़ बढ़ जायेंगी|”
“एक
दो लड्डू खाने से कुछ ना होता है,उलटे ताकत ही रहती है शरीर में |”
“इनका
वज़न भी बढ़ता जा रहा है पेट भी निकल रहा है ,बढ़ते मोटापे को अभी से ही रोकना चाहिए
|”
“ये
तो खाते पीते खानदान की निशानी है | ४० बरस के बाद तो सब लड़के थोड़े बहुत अच्छे हो
ही जाते हैं | ठहराव आता है ज़िंदगी में |”
“अब
आपको कैसे समझाऊं इनको खाने की चीजों के मामले में अपनी ज़बान पर नियंत्रण नहीं है
इसलिये हम लोगों को ज्यादा ध्यान रखने की ज़रुरत है |”
“वो
तो शुरू से ही खाने का शौकीन रहा है| जितना ज्यादा टोकोगी उतनी ही और खाने की
इच्छा होती है| फिर घर का बना है बाज़ार का थोड़े ही है| मां की ममता भी तो होती है
,कुछ बनाऊँ ,खिलाऊँ |”
“मांजी
ये आपका कैसा लाड़ व ममता है कि आप अपने ही बेटे को वही चीजें खिलाना चाहती हैं जो
उसे नुकसान पहुंचा रहीं हैं| मेरी बात तो जाने दीजीये कम से कम डॉक्टर की रिपोर्ट
का तो सम्मान कीजीये|”
मनीषा
सक्सेना
इलाहाबाद
मन की हालत बयान करती,उहपोह में समझदारी दिखाने का मार्गदर्शन करती बेलौस लघुकथा।
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